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lockdown और कोरोना के बढ़ते प्रभाव के चलते स्टूडेंट्स कर रहे श्रमदान। पेड़ लगाकर कर रहे लोगो को जागरूक

 

lockdown और कोरोना के बढ़ते प्रभाव के चलते स्टूडेंट्स कर रहे श्रमदान। पेड़ लगाकर कर रहे लोगो को जागरूक।

students: pitamber sahu ,amit sonwani ,tushant nishad ,lokanath nishad , bhupesh और कुछ साथी |

पर्यावरण को संतुलित एवं स्वच्छ बनाने के लिए अब students ने भी लोगों को प्रेरित करने के लिये कदम बढ़ाया है। कार्यक्रम की अध्यक्षता पर्यावरण मित्र भैया" बृजेश गायकवाड़ " ने की।

 पेड़-पौधे पर्यावरण को बचाने के लिए बेहद जरूरी हैं और इसलिए खत्म हो रही हरियाली को बरकरार रखने के मकसद से हर वर्ष बड़े पैमाने पर सरकारी स्तर पर पौधरोपण किया जाता है।वन विभाग के साथ ही कई सरकारी महकमे और गैर सरकारी संस्थाएं इस अभियान में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेती हैं।


पौधारोपण की कार्ययोजना पर सवाल

दरअसल पौधारोपण की संख्या को लेकर किये जाने वाले सरकारी दावों को सच माने तो सरकार के पौधारोपण अभियान की कार्ययोजना पर सवाल खड़े होते हैं। पौधे रोपने के बाद उनके संरक्षण और रखरखाव के लिए किसी तरह का ठोस कार्यक्रम तैयार नहीं होता। यही कारण है कि ज्यादातर पौधे उत्सव के माहौल में रोप दिए जाते हैं लेकिन बाद में वे सूख जाते हैं या जानवर चर जाते हैं। इन पौधों के संरक्षण के लिए सरकारी स्तर पर किसी तरह की जिम्मेदारी या जवाबदेही तय नहीं की गई है। पौधों को रोपने के बाद उन्हें बचाने को लेकर भी कार्यदायी संस्थाओं को कोई ठोस लक्ष्य नहीं दिया जाता जिसके कारण पौधारोपण अभियान को वह सफलता मिल नहीं पा रही जो लक्ष्य सरकार निर्धारित करती है।

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